सवाल
माँगी नहीं मैंने रातों की सफाई मगर सवाल आज भी मन में हैं
मेरे प्यार का एक भी कतरा क्या तेरे साहिल में है
रात की ख़ामोशी में इतने एहसासो के परदे खोले थे
की जिनके अक्स जिस्म से रूह में बस हैं
तेरे उस बंद दरवाज़े ने देखि है मेरी तड़प
की तपती रेत पर कैसे हैं गुज़ारे मैंने पल
बुझ गयी होगी प्यास तेरी मेरे करीब आकर
मगर मेरे एहसास तब से कोरे के कोरे हैं
तेरे करीब आने का मुझे मिला है ये सिला
की तू खेलता रहा और मैं हो गयी तबाह
श्रुति शर्मा
माँगी नहीं मैंने रातों की सफाई मगर सवाल आज भी मन में हैं
मेरे प्यार का एक भी कतरा क्या तेरे साहिल में है
रात की ख़ामोशी में इतने एहसासो के परदे खोले थे
की जिनके अक्स जिस्म से रूह में बस हैं
तेरे उस बंद दरवाज़े ने देखि है मेरी तड़प
की तपती रेत पर कैसे हैं गुज़ारे मैंने पल
बुझ गयी होगी प्यास तेरी मेरे करीब आकर
मगर मेरे एहसास तब से कोरे के कोरे हैं
तेरे करीब आने का मुझे मिला है ये सिला
की तू खेलता रहा और मैं हो गयी तबाह
श्रुति शर्मा
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