Sunday, 6 November 2016

Marham
jeher peekar bhi kadam Sambhale Hein
badale hue wawt k sath
khokar khud ko bhi khud ko
jana h
ki bura nhi maykhano ka sath
Safar ye Mandir se maykhane ka nahin
sach parakhane ki Jidd h
ki Luti draupadi bhi thi
to wazood Kanha ka bhi h.
paak aur pawan m aj bhi hu
bas safar Sita se r adha ka h
halaq se waqt ka har niwala nikala h
par sach ka daaman utna hi ujla h
biwi ,bahu, b ehen o beti har roop
ghayal hua h
tohmato ka safar Kahan abhi thama h
Magar th am gaya tha vo junoon
jo sabko bandhne KO besabra tha
kuch asar baki Tha Magar us jiddo jehed ka
ki Phir ghar najr aane laga h
mere har Jakhm ka jawab
Ab Marham ho Jane laga h
shruti sharma

Sunday, 17 January 2016

        सवाल
माँगी नहीं मैंने रातों की सफाई मगर सवाल आज भी मन में हैं
मेरे प्यार का एक भी कतरा  क्या तेरे साहिल में है
रात की ख़ामोशी में इतने एहसासो के परदे खोले थे
की जिनके अक्स जिस्म  से रूह में बस हैं
  तेरे उस बंद दरवाज़े ने देखि है मेरी तड़प
की तपती रेत पर कैसे हैं गुज़ारे मैंने पल
बुझ गयी होगी प्यास तेरी मेरे करीब आकर
मगर मेरे  एहसास तब से कोरे के कोरे हैं
तेरे करीब आने का मुझे मिला है ये सिला
की तू खेलता रहा और मैं हो गयी तबाह 
श्रुति शर्मा 

Sunday, 10 January 2016


 १२ दिन का मोल 
बिक गए आंसूं अपनों के खड़ा जमाना  देख रहा 
 हां वो मेरा अपना था जो आंसू को भी बेच गया 
वो १२ दिन के हर पल की कीमत चंद कागज़  में ढूंढ गया 
दिखाकर आंसू हर लम्हे को लूट गया 
मृत्यु शैय्या पर लेटे हुए के घर का ये मान रखा 
बिन कटोरे भीख मांग ली उसके  बच्चो के नाम पर 
टूटती हुई ममता नही न रोटी हुई किलकारी देखी 
उसने अपने स्वार्थ में बस नोटों की यारी देखी देखिी
ताउजी का स्नेह नहीं वो ढोंग और आडम्बर है 
चाचा से उम्मीद नहीं बिक गया इनका अम्बर है 
सर पर रखा हाथ नहीं ये कफ़न की  तैयारी है 
 अपनों की दुनिया बस १२ दिन के फरेब की मारी है