१२ दिन का मोल
बिक गए आंसूं अपनों के खड़ा जमाना देख रहा
हां वो मेरा अपना था जो आंसू को भी बेच गया
वो १२ दिन के हर पल की कीमत चंद कागज़ में ढूंढ गया
दिखाकर आंसू हर लम्हे को लूट गया
मृत्यु शैय्या पर लेटे हुए के घर का ये मान रखा
बिन कटोरे भीख मांग ली उसके बच्चो के नाम पर
टूटती हुई ममता नही न रोटी हुई किलकारी देखी
उसने अपने स्वार्थ में बस नोटों की यारी देखी देखिी
ताउजी का स्नेह नहीं वो ढोंग और आडम्बर है
चाचा से उम्मीद नहीं बिक गया इनका अम्बर है
सर पर रखा हाथ नहीं ये कफ़न की तैयारी है
अपनों की दुनिया बस १२ दिन के फरेब की मारी है
बिक गए आंसूं अपनों के खड़ा जमाना देख रहा
हां वो मेरा अपना था जो आंसू को भी बेच गया
वो १२ दिन के हर पल की कीमत चंद कागज़ में ढूंढ गया
दिखाकर आंसू हर लम्हे को लूट गया
मृत्यु शैय्या पर लेटे हुए के घर का ये मान रखा
बिन कटोरे भीख मांग ली उसके बच्चो के नाम पर
टूटती हुई ममता नही न रोटी हुई किलकारी देखी
उसने अपने स्वार्थ में बस नोटों की यारी देखी देखिी
ताउजी का स्नेह नहीं वो ढोंग और आडम्बर है
चाचा से उम्मीद नहीं बिक गया इनका अम्बर है
सर पर रखा हाथ नहीं ये कफ़न की तैयारी है
अपनों की दुनिया बस १२ दिन के फरेब की मारी है
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