Sunday, 13 September 2015

कुछ लोग जीवन में ऐसे  होते हैं
जिनसे ना रिश्ता होते हुए भी रिश्ता बन जाता है
बारिश  की बूंदों सा कोई साथ
ठंडक दे जाता  है
कोई बड़ा कोई छोटा किसी भी उम्र का हो
जीवन में नया रंग   भर जाता है
हो जाते हैं खून के रिश्ते अजनबी
पल भर के  साथ  में कोई जिंदगी  बन जाता है
आज लगता है फिर खुद से प्यार करूँ
कुछ लम्हों  को मेरा भी साथ भा गया है

कुछ  लम्हे जीवन की धारा   बदल गए 
ना कुछ माँगकर भी अपना कर गए  
किस दुआ से माँगूँ ख़ुशियाँ उनकी 
 जो खुद दुआ से हैं ये इशारा  कर गये 
जो मेरी तड़प को समेट  कर 
मुस्कुराना सिखा जाते हैं
 बिना किसी उम्मीद के
 चलते ही ही जाते हैं
ये आरज़ू है की उस लम्हे पर  मैं 
क़ुर्बान कर दूँ  खुद को 
जो उम्मीद बन जीवन की धारा बन गए 

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